
जयकांत मिश्र लेल मिथिलाक दधीचि कहब कम होयत. जयकांतक पर्याय मात्र जयकांत भ'सकैछ. इलाहबाद में रहितो मैथिली आ मिथिलाक लेल हुनक अनवरत संघर्ष सदति आदर्श रहत.
नव पीढी में मायिक भाषा आ मायिक भूमि लेल अनुराग, सम्मान आ गौरवक भाव भरल रहय तखने एहेन विभूतिक ह्रदय जुडा सकत.

jaykant jee ker kaj ke tatka peerhi dwara aaga barhebak jarurati achhi!
ReplyDeleteBahut dukhad samachar achhi......................hunak BRIHAT MAITHILI SHABDAKOSH purna prakashit bhelanhi ki nahi ?
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