जनसत्ताक 1 मार्च 2009, रवि दिनक अंक में अपन स्तम्भ कागद कारे में प्रभाष जोशी एक रेल यात्राक विवरण देइत रेल बोगी में एक गोट दम्पत्तिक आपसी व्यव्हार (जे हुनका अरुचिकर लागलैन)
केर जिक्र केने छथि. ओ लिखैत छथि - मुस्कान आ बोली सं ओ दंपत्ति बिहारक लगैत छलै.
बोली सं प्रान्त चिह्नब कोनो विशेष बात नहि मुदा मुस्कान सं ??????
की बिहारक लोक सबहक मुस्कान आन प्रान्तक लोक सब सं भिन्न होइत छैक ???
( इ किछु आर नहि पूर्वाग्रहक प्रस्तुति थिक.) जेना कि हुनकर वर्णन छैन्हि अहि मुस्कानक कोनो नीक अर्थ लगायब मोश्किल अछि. संस्मरणक अंत होइत होइत एहन संकेत भेंटत अछि ओ दंपत्ति तें अभद्र छलै जें बिहारक छलै. हुनकर स्तम्भ सं सन्दर्भ अंश उपलब्ध करायल जा रहल अछि. प्रभाष जोशी सन व्यक्तित्व सं अहि तरहक टिपण्णीक अपेक्षा नहि कयल जा सकैछ.
Friday 6 March 2009
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Prabhash ji ka likhba se pahine soich lebak chahi. aih tarhak tippani aahat karait aichh.
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